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हिंदी नझमे – नझर

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तुम मेरी ज़िन्दगी मेरा क़रार
हो गया मुझको तुमसे प्यार
तू आ जाये अगर मेरे क़रीब
तो खुल जायेगा मेरा नसीब
तुमको जिस दिन से देखा है
आँखों में तेरा ही चेहरा है…

तुम मेरी ज़िन्दगी मेरा क़रार
हो गया मुझको तुमसे प्यार

तेरी जुदाई हम सह न सकेंगे
तेरा नाम लब से न मिटायेंगे
भूल गया सारा जहाँ तेरे लिए
कर जाऊँगा कुछ भी तेरे लिए
रस्में तोड़ दूँ, दुनिया छोड़ दूँ
भूल जाओ ग़म इतना प्यार दूँ

तुम मेरी ज़िन्दगी मेरा क़रार
हो गया मुझको तुमसे प्यार
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जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं

अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है
जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है
ख़्यालों की राहों पर मुलाक़ातें होती हैं
मिलते हैं जब पुरानी बातें होती हैं

ख़्याल अरमानों की डोली सजाते हैं
उठता है दिल में धड़कनों का तूफ़ान
ख़ुशबू तेरी बहती है इन फ़िज़ाओं में
ढूँढ़ता हूँ राहों में तेरे पैरों के निशान

जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं

हर आहट तेरा नामो-निशाँ देती है
तू आज भी सखी मुझमें रहती है
सितारों इन नज़ारों में तू दिखती है
अँधेरों से उजालों से तू बनती है

जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं

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यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

उसने इजाज़त नहीं दी है हमें
उन लम्हों को दोबारा पढ़ने की
गुज़रें है वह कभी इधर से
यह बात भुला देने भूलने की

मेरे दरवाज़े तक राह आती है
मगर खुलती है कहीं और यह
समझाते हैं कभी ख़ुद को हम
या भुला देते हैं भूल जाते हैं

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

हम खोलते हैं उन पन्नों को
जिन पर तेरा नाम लिखा था
उड़ जाता है दिल से दर्द वह
जो ख़ुद कभी ख़ुद में सना था

क़ातिल वह मेरे दिल का होगा
कब यह हमसे उसने कहा था
खुल जायेगा वह ज़ख़्म फिर से
जो हमने मुद्दत में सिला था

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

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प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है
उड़ जाये होश खो जाये दिल
कुछ ऐसा काम कर जाता है

मेरे सपनों में कोई आने लगा
देने लगा मुझको कोई सज़ा
एतबार क्यों ख़ुद पर न रहा
वह मेरा यह हाल कर गया
हो गया प्यार हो गया प्यार
मुझको उससे प्यार हो गया

प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है
उड़ जाये होश खो जाये दिल
कुछ ऐसा काम कर जाता है

चार-सू वह नज़र आने लगा
छाने लगा मुझ पर यह नशा
एतबार क्यों ख़ुद पर न रहा
वह मेरा यह हाल कर गया
हो गया प्यार हो गया प्यार
मुझको उससे प्यार हो गया

प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है
उड़ जाये होश खो जाये दिल
कुछ ऐसा काम कर जाता है

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तृप्तीका कर लेना एहसास आज
पुरा मयखाना है तेरे आज तेरे काज.
भर ले भर ले जाम दो दो बार
कर ले कर ले मस्ती दो दो बार.
होठ तरसते है जामके लिये
आंखे तरसती साकिके लिये.
कीसीकी सोनेरी लट और
कीसीका गुलाबी सुख.
यह जनम है चोरासी अवतार बाद
प्रीत और पीयु है तेरे लीये आज.
कर ले करे ले प्रियाको प्यार
लेले आंलिगनमे बुजाले प्यास.
यही तो है भवसागरका सार
सुन रहा है प्रियतमाका साद.
प्रेम तुजे करती है दुनिया आज
तेरा  व्यापारी सत्य   सच्चा   बाप.
छोड दे संसार त्यागकी बात
ब्रह्मचर्य तो है योगीका राझ.
(नरेश के. डॉडीया)

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यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात
जैसे यह कोरे हैं वैसे मेरे दिन-रात
अपनी मुलाक़ात कब मुकम्मल हुई थी
दर्द मेरे दिल में बढ़ते रहे इफ़रात…

इन अफ़सानों में अपना एक किरदार है
ज़ुबाँ से निकला हर लफ़्ज़ किरायेदार है
गुज़रती तारीख़ों में तेरी राह तकते हैं
यह फ़ैसला कैसे हो किस पे एतबार है

यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात
जैसे यह कोरे हैं वैसे मेरे दिन-रात…

बैठते हैं जब अकेले यूँ तन्हाई में हम
एक ख़त लिखने की सोचते हैं तुम्हें हम
तभी एक आहट-सी कानों में जाती है
और फिर खिड़की से देखते हैं तुम्हें हम

अपनी मुलाक़ात कब मुकम्मल हुई थी
दर्द मेरे दिल में बढ़ते रहे इफ़रात…

संवाद:
हर कोरा काग़ज़ यूँ फड़फड़ाता है
जैसे आवाज़ देकर हमें बुलाता है
एक तकलीफ़ दिल में उठती है
जब आपका ख़्याल हमें आता है

– ‘नज़र’

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जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का
जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम
जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम

तेरा एहसास था कभी दिल के पास
तू क्यूँ तोड़ गया जीने की हर आस
नहीं थी उन गुलों में ख़ुशबू ज़रा भी
वह भीगे हुए गुल थे जैसे पलाश

जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम

तन पर मद्धम-मद्धम धूप गिरती है
लॉन में कुर्सी डालकर बैठे हैं हम
याद आते हैं सुस्त दिन सर्दियों के
जब तुझे हँसते देखा करते थे हम

जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं
चाँद से बिछड़कर तन्हा हुए हम

– ‘नज़र’

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कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी
जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी
उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली-नीली
जिनसे मेरे ख़ाबों की दुनिया है उजली

उसने आने से खिलते हैं गुलशन हज़ार
जानता है हर कोई यहाँ जो है तलबगार
लाखों-करोड़ों में उसके जैसा कोई नहीं
वह यार बने मेरा इतना तन्हा वह नहीं

उसे देखते हैं सभी रखते हैं दिल उधार
उड़ें बादलों के टुकड़े आसमाँ में बेशुमार
कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी
जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी

मौसम लौटा आया, लौट आयी है बहार
वह सूखे बाग़ीचे हमने देखे हैं गुलज़ार
उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली-नीली
जिनसे मेरे ख़ाबों की दुनिया है उजली

– ‘नज़र’
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आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ
रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ
तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए

जाने कब से तू आँखों में बसी है
जाने कब से यह महफ़िल सजी है
यूँ ही घर आना-जाना बढ़ गया
एक पल में तेरा नशा चढ़ गया

एक ही ख़ाब आँखों में बसाया है
तुमको हर जनम अपना बनाना हैं
मेरी हर दुआ है तुझे माँगने के लिए

जाने कब यह रिश्ता बंध गया
आँखों ही आँखों में मेरा दिल गया
बातों ही बातों में तुम लुभाने लगे
और तन्हाई के डर सताने लगे

आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ
रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ
तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए

– ‘नज़र’
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एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है

कुछ दिनों से दिल पर छायी है
शायद, शायद ऐसा तब लगता है
जब प्यार किसी से होता है

ख़ाबों में जाने कौन आने लगा है
रातों को नींदें चुराने लगा है
शायद, शायद ऐसा तब होता है
जब प्यार किसी से होता है

जब से वह ख़ाबों में आया है
दिल बेचैन रहने लगा है
उसको सामने हर पल देखने को
दिल बेताब रहने लगा है

शायद, शायद ऐसा तब लगता है
जब प्यार किसी से होता है

अन्जाना नहीं जाना-पहचाना है
सपना है उसको अपना बनाना है
शायद, शायद ऐसा तब होता है
जब प्यार किसी से होता है

अब वह मेरी मंज़िल बन गयी
अब वह मेरा सपना है
वह दिल की धड़कन बन गयी
अब वह मेरी तमन्ना है

शायद, शायद ऐसा तब लगता है
जब प्यार किसी से होता है
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हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है
हर लम्हा ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से दूर करता है
जाने किस रफ़्तार दोनों का दिल शोर करता है

जाने अन्जाने मुझसे कितनी गुस्ताखियाँ हो गयीं
हम क्यों समझ न पाये और आप दूर होती गयीं
थोड़ी-थोड़ी दोस्ती न जाने कब मोहब्बत बन गयी
एक फूल खिला और सारी फ़िज़ा जन्नत हो गयी

हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है

वही समझता है यह इश्क़ जो इश्क़ का मारा है
समझे पाये बहुत देर से हम, यह कच्चा सहारा है
पलकें भारी हो जाती हैं कोशिश करते हैं जागने की
कैसी ज़िन्दगी है ज़रूरत पड़ती है साँसें माँगने की

हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है

– ‘नज़र’

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तेरी ख़ुश्बू का पता करती है,
मुझ पे एहसान हवा करती है.

शब की तन्हाई में अब तो अक्सर
गुफ़्तगू तुझ से रहा करती है.!

दिल को उस राह पे चलना ही नहीं,
जो मुझे तुझ से जुदा करती है…!!

ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो,
तेरे कहने में रहा करती है.

उस ने देखा ही नहीं वर्ना ये आँख
दिल का एहवाल कहा करती है..!!

दुख हुआ करता है कुछ और बयाँ
बात कुछ और हुआ करती है.!

अब्र बरसे तो इनायत उस की
शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है.

मसला जब भी उठा चिराग़ों का.
फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती है..!!
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तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए
एक बार तो कुछ कह दे सनम
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए

तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए

तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से
हम एक-दूजे के बने जनमों से
तुमने जनम लिया है मेरे लिए

आँखों में माहताब-सा चमकता है
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए

– ‘नज़र’
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शीतल जल में चंदन घुला हो
ऐसी थी काया
काले-काले बादलों से घनी थी
ज़ुल्फ़ों की छाया
क्यों जचने लगी यह बेख़ुदी
कैसी है माया

माया यह तेरी कैसी माया है
हर तरफ़ तेरा जादू छाया है
जाने कैसा मौसम आया है
दिल ने जाने क्या पाया है
दिल में तुझको ही बसाया है
नसों में तेरा इश्क़ समाया है

ऐसे कोई छोड़ के जाता है
यारों को रुलाता है
कभी-कभी ऐसा हो जाता है
कोई रह जाता है
जो सपनों में रोज़ बुलाता है
वादों को निभाता है

इन राहों पर जब आती है
इस दिल में तू समाती है
ऐसे क्यों हुस्न दिखाती है
ऐसे क्यों उन्स उठाती है
काहे को नज़रें झुकाती है
कहाँ दिल को ले जाती है

माया यह तेरी कैसी माया है
हर तरफ़ तेरा जादू छाया है
जाने कैसा मौसम आया है
दिल ने जाने क्या पाया है
दिल में तुझको ही बसाया है
नसों में तेरा इश्क़ समाया है

– ‘नज़र’

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तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले
ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने
दिल मेरा क्यों टूट गया रब जाने

तुम गये तन्हा हो गयी ज़िन्दगी
तुम गये दिल से गयी हर ख़ुशी
हर लम्हा तू मुझे याद आ रही है
याद आ के मुझे तड़पा रही है

तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले

यारा, तेरे चाहने वाले हम हैं
मेरे दामन में कितने ग़म हैं
कैसे रहते हैं हम यहाँ ज़िन्दा
जैसे साहिल पे मिट्टी का घरौंदा

तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले
तू आ कभी देख ले मेरी बेख़ुदी
तू आ कभी लौटा दे मेरी ज़िन्दगी

यारा तू ज़िन्दगी, तू है ज़िन्दगी…

– ‘नज़र’

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तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
दिल की सदा साँसों के सिलसिले
कहते हैं तुम मेरे हो तुम मेरे हो
यह तूफ़ान यह ऊँचा-ऊँचा आसमान
कहता है तुम मेरे हो तुम मेरे हो
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो

जलती है नस-नस में तेरी मोहब्बत
आते नहीं आँखों में अश्क क्योंकि
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
दिल को लगी तेरी लगन, तरसते हैं
तेरे लिए मेरे यह दो नयन क्योंकि
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो

जाओ चाहे जहाँ भी तुम अलग नहीं
यह तुम्हारा दीवाना तुम्हें ढूँढ़ लेगा
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
तेरी लकीरों से मेरी लकीरें जुड़ी हैं
तेरा शैदाई दिल में इश्क़ जगा देगा
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो

– ‘नज़र’
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एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना
इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम
हर लम्हा तेरा नाम जपता हूँ सनम
हाल मेरा बद से बद्तर हो गया है
ज़िंदगी का हर पल बेज़ार हो गया है

एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना
अब तेरी राहों में रहता हूँ यार मेरे
कर दिये नाम तेरे मैंने दिन-रात मेरे
तेरी साँसों की ख़ुशबू, बसी है मन मे‍
खिलते हैं जो गुल यार तू है उनमें

एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना
सीख रहा हूँ मैं, तन्हा कैसे रहते हैं
तन्हा रहकर, कैसे हर पल जीते हैं

– ‘नज़र

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यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है
मैं जिसको चाहता हूँ
वह मुझसे बेरंग है
उड़ती है बिल्कुल अकेली
ढ़ूढ़ती है कोई सहेली
यह सच है या कोई पहेली
कभी इधर डोलती है
कभी उधर डोलती है
जाने किसमें क्या टटोलती है
यह मुमकिन को
ना-मुमकिन समझती है
जितना समझती है
उतना ही उलझती है

यह ज़िन्दगी मेरी, एक पतंग है
मैं जिसको चाहता हूँ
वह मुझसे बेरंग है
वह साथ नहीं मेरे
फिर भी लगता है मेरे संग है
यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है
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अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें,
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें.

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,
चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें.

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाये,
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें.

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे,
चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें.!!

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें,
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें…..

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जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो दिल में आकर बसा था
तू वह मीत है

साँसों की सरगम बस तुम ही तुम
लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम

कहना कितना मुश्किल था
यह समझा न सके
अपने दिल की बात हम
तुम्हें बता न सके

जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो दिल में आकर बसा था
तू वह मीत है

प्यार क्या है सनम हमें कब पता था
हमें जब तुम मिले तब पता चला था

अकेले रहना मुमकिन नहीं
यह कह न सके
अपने दिल के जज़्बात हम
तुम्हें जता न सके

जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो दिल में आकर बसा था
तू वह मीत है

अब तो ऐसा लगता है मुझको
जैसे फूलों में ख़ुशबू नहीं है
तुम जो नहीं यहाँ पर सनम
जैसे यहाँ पर कुछ भी नहीं है

बेचैन करती हैं यादें दिन-रात
बुझती नहीं हैं साँसें
हर लम्हा सोचता हूँ क्या मैं
करूँ तो क्या करूँ

जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो दिल में आकर बसा था
तू वह मीत है

कुछ और अब बाक़ी नहीं
बस मैं हूँ मेरा ख़ाब है
ख़ामोश रहती हैं यह रातें
बस मैं हूँ मेरा साथ है

ज़िन्दगी मेरी तुम बदलकर चले गये
तन्हा कर गये हमें तन्हा कर गये

जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो दिल में आकर बसा था
तू वह मीत है

– ‘नज़र’
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ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में

तन्हाई है तन-मन में,
ख़ाबों का आशियाँ बनाया था हमने
वह बिखरा पड़ा है यहीं-कहीं पे,
फूल-पत्तों का मौसम जा चुका है
पतझड़ लगा है बरसने…
पीले पत्ते लगे हैं गिरने…

ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में

मौसम के फूलों में जो ख़ुशबू थी
वह अब नहीं है उनमें,
कैसे बेरंग हुए सब यहाँ पर
कोई अपना नहीं है इनमें,
बादलों का मौसम आ रहा है
सावन लगा है तरसने…

ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों में
चाँद भी कहीं खो गया है तारों में

अब कहाँ है रोशनी मैं हूँ बेख़बर,
जाने कब होगा ख़त्म
मंज़िलों का यह तन्हा सफ़र,
जाने कब आयेगा वह मेरा हमसफ़र
दिल बेख़बर, दिल बेसबर…
दिल बेसबर, दिल बेख़बर…

– ‘नज़र’
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बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने
बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने…

क्या वहाँ तक, वहाँ तक
मेरी आवाज़, मेरी सदा जाती नहीं
क्या वहाँ तुझे, वहाँ तुझे
मेरी बातें, मेरी याद सताती नहीं

बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने
बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने…

हर तरफ़ तू नज़र आती है
पल-पल तू दिल में समाती है
बेवफ़ा तू हो सकती नहीं
दिल से जुदा तू हो सकती नहीं

क्या वहाँ तक, वहाँ तक
मेरी आवाज़, मेरी सदा जाती नहीं
क्या वहाँ तुझे, वहाँ तुझे
मेरी बातें, मेरी याद सताती नहीं

बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने
बिछड़ के रहना सीख लिया है
क्या तुमने, क्या तुमने…

– ‘नज़र’
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रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाये
कभी तो पास बुला लो
तेरी नज़दीकियों का
मुझे एहसास हो जाये

गुलाबी शाम ढलती है
रोज़ गुज़रती हो
मेरे घर के सामने से
मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ
आइना जब भी हो हाथों में
उससे तेरी बातें करता हूँ…

रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाये
एक रिश्ता बना लो
मुलाक़ात लाज़मी हो जाये

तेरे सिले हुए लबों पर
क्या इक़रार होगा
मेरा ख़्याल है कि इज़हार होगा
बात कोई नही, बात तुम में है
मैं न हूँ शायद तुझमें
पर तू मुझमें है…

रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाये
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इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन

चाँद जो वह आसमाँ पर है
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं
लेकिन नज़र में तुम नहीं

तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन

नग़मा जो वह ज़ुबाँ पर है
कलमा जो वह दिलो-जाँ पर है
बेवफ़ा, सुनो मेरे दिल की सदा
तेरे लिए ही है मेरी वफ़ा

तुमसे ही मेरा जहाँ, तुम मेरी हमनवाँ
एतबार मेरा कर ले मुझे बाँहों में भर ले

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन
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आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद
आज फिर तेरी आँखों को देख्नने की ख़ाहिश हुई
आज फिर सुलगने लगे मेरी आँखों के आँसू
आज फिर बुझती हुई एक तमन्ना ने अँगड़ाई ली

चाँद हसीन था तेरे जिस्म-सा शामीन था
तेरे ग़म में यह कब मुझसे ग़मगीन था
रोज़ महकता था मगर सुनहरा था
आज कुछ ज़्यादा गुलाबी और गहरा था

आज फिर दिल के जज़्बात बह निकले दिल से
आज फिर उस मकान में तुम्हें देखने की ख़ाहिश हुई
आज फिर कुछ अजीब भँवर थे मेरी धड़कनों में
आज फिर नस-नस में लहू ने चिन्गारी जला दी

तुमसे मेरी मुहब्बत बहुत याद आ रही है
गुलाबी चाँद कह रहा है तू आ रही है
आ लौट आ अब लौट भी आ तू कहाँ है
तुमसे मेरे सपनों का यह हसीं जहाँ है

आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद
आज फिर तेरी आँखों को देखने की ख़ाहिश हुई
आज फिर कुछ अजीब भँवर थे मेरी धड़कनों में
आज फिर नस-नस में लहू ने चिन्गारी जला दी

– ‘नज़र’

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जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो
न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो…

वक़्त के क़तरे बहते रहते हैं
हम भी तेरे नशेमन में रहते हैं
आवाज़ देना हमें हम लौट आयेंगे
जायें भी तो और कहाँ जायेंगे

जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो
न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो…

तुमने मुझे अजनबी कह दिया है
इक शीशे के मर्तबाँ में बंद कर दिया है
अब हम साँस कैसे ले पायेंगे
तेरे नाम के साथ दफ़्न हो जायेंगे

जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो…

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नींद गहरी है रात ठहरी है
आज ख़ाबों की बग़िया हरी है
चाँद खिला है पेड़ पर
पेड़ के नीचे एक लड़की है

वह मेरी जाने-जाँ है
वह मेरी मोहब्बत का जहाँ है
ढूँढ़ने चला मैं उसको
आख़िर मेरी दुनिया कहाँ है

रोज़-रोज़ गली-गली
हर चौराहे मैं धूल बनके उड़ा
कभी अपनों से मिला
अजनबी और ग़ैरों से जुड़ा

तेरे बिना दिल तन्हा है
तू चाँद है, ख़ुश्बू है, सुबह है
यह ज़िन्दगी अधूरी है
बहती एक आँधी की तरह है

रोज़ तन्हा बैठता है चाँद जहाँ
वह मेरे घर की एक खिड़की है

उसे फूलों के बाग़ों में देखा है
तितलियों-सा उड़ते देखा है
वह हँसती है फूल खिलते हैं
उसे फूलों में खिलते देखा है

मैं सारा दिन ख़्यालों में उड़ता हूँ
वह कोई रूबीना है कोई परी है…

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मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है
जिस्म यहाँ, जान कहाँ, जान कहाँ है

तड़प-तड़प कर साँसें जिस्म में पलती हैं
दिन-रात दिल की आहों में जलती हैं
यह मेरा नसीब है या वक़्त का क़तरा
थाम लिया है किसने अब तक न गुज़रा

मुझको आवाज़ दे है तू कहाँ, तू कहाँ है
मेरे हमदम, मेरे हमनवाँ, तू कहाँ है…

नीली शाम यह सूरज जब पिघलता है
गुलाबी चाँद दो बोझल आँखों में गलता है
पतझड़ को शाखों पर किसने सजाया है
टूटे हुए आइने में अक्स अपना दिखाया है

आ तू कभी मेरी बाँहों में आ, तू कहाँ है
मेरे हमसफ़र, मेरे हमनवाँ, तू कहाँ है…

– ‘नज़र’

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जब कभी वह शाम मुझे याद आयी
मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी

माना आज शाम का वह रंग नहीं
और मेरी जान तू भी मेरे संग नहीं
मगर दिलो-ज़हन से हर वक़्त
तेरे ख़ाबो-ख़ाहिश में फ़रियाद आयी

जब कभी वह शाम मुझे याद आयी
मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी

ढलती गुलाबी शाम मुझसे कहती है
सिर्फ़ एक तू मेरे दिल में रहती है
‘विनय’ जुदा हो तुम बिन कैसे जिये
ये बात उसे समझ बहुत बाद आयी

जब कभी वह शाम मुझे याद आयी
मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी

-‘नज़र’

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वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की मुझको सज़ा दे
दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे

अरमान पिघलकर ख़त्म न हो जायें
दिल में साँसें दफ़्न न हो जायें
अपने सीने से लगा ले मुझे
दिल में अपने मुझको जगह दे

तेरी राहों पर निगाह है मेरी
मेरे दिल में सिर्फ़ चाह है तेरी
मेरे जीवन को अपनी चाहतों में डुबा दे
मेरे सनम जीने की मुझको वजह दे

वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की मुझको सज़ा दे…

सूनी-सूनी आँखें रूख़ी-रूख़ी आँखें
ख़ाली-ख़ाली है सीना ख़ुश्क़ हैं साँसें
जुदा रहके जुदाई में जीना मुमकिन नहीं
मेरे प्यार को अपने प्यार की फ़िज़ा दे

दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे…
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मैं उससे मोहब्बत करता था
आज भी करता हूँ
काँच के दिल में जान भरता हूँ

मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में
उसकी ही चाहत है
वह जो है मेरी ज़िन्दगी है
मुझे चैन है राहत है

मैं तन्हा था अकेला था
आज उसके लिए जीता हूँ
आँखों से उसकी प्यार पीता हूँ

सपने हक़ीक़त हो गये हैं
दोनों इक जाँ हो गये हैं
निगाहों से नज़रों तक हम
एक-दूसरे में खो गये हैं

लम्हा यह लम्हा जी लिया है
जो दिल उसको दे दिया है

मैं उससे मोहब्बत करता था
आज भी करता हूँ…

– ‘नज़र’

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मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

पहली नज़र में होश गुम गया
दूसरी नज़र का हाल कैसे बताऊँ
दिल को आना था तुम पर आ गया
भला दिल को मैं कैसे समझाऊँ

पहले चरचे मेरी यारी के होते थे
अब मैं हो गया ख़ुद से बेग़ाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

आशिक़ी, उल्फ़त, प्यार, मोहब्बत
हमने तो बस यह नाम सुने थे
देखकर तुम्हें जाना लोग सच कहते थे
जो प्यार करता है ख़ुद से डरता है
शीरीं-फ़रहाद कब ज़माने से डरते थे

तेरे हुस्न की कटार दिल पर चली है
मिटकर रहेगा शमअ पर परवाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

दिल का हाल अजब हो गया है
उसका सितम ग़ज़ब हो गया है
यह इश्क़ अक़ीदत हो चला है
तुमसे प्यार मेरा रब हो गया है

दिल में लहू नहीं तेरा प्यार बहता है
यह दिल है तुम्हें चीरकर दिखलाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

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मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर
मेरे जिस्मो-जाँ को जीवन दे जा ओ बेवफ़ा फिर

इन राहों पर हल्के गुलाबी फूल खिलने लगे हैं
बेज़ुबाँ दिल में मोहब्बत के अरमान जगने लगे हैं
आ निगाहों में आ जा, कर दे धड़कनें रवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

उदासियाँ, तन्हाइयाँ, मुझसे शिकवे करने लगी हैं
आँखों में, रोज़ ख़ाबों में, तेरी तस्वीरें बनने लगी हैं
आ मेरे सनम कर दे धुँधली-धुँधली यादें जवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

यह प्यार मुझको दुनिया से गुमराह करने लगा है
तेरा दीवाना हर चेहरे में तेरा चेहरा पढ़ने लगा है
बता तू, मुझसे मिलेगी, कैसे, कब और कहाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

– ‘नज़र’
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मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए
पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए
जीता है तेरे लिए, मरता है तेरे लिए

सामने तेरा आना, शरमाना, नज़रें चुराना
उफ़! तेरी हर तिरछी क़ातिल अदा पर
मेरा फ़िदा हो जाना, कुछ न कह पाना

इस तरह ऐसे हाल में कब तक जियूँगा
तेरे क़रीब होकर भी दूर कब तक रहूँगा
मेरा आँखों से कहना, तेरा आँखों से पढ़ना
बड़ा मुश्किल है, दूर रहना, सब सहना

मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए
पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए
जीता है तेरे लिए, मरता है तेरे लिए

मेरी रूह को सुकूँ दे, जीने को कोई जुनूँ दे
प्यार मुश्किल, तन्हाई हासिल न बना
मेरा दिल चाँद है, चाँदनी की तलाश है
हाँ कह भी दे तू दिल के आस-पास है

सामने तेरा आना, शरमाना, नज़रें चुराना
उफ़! तेरी हर तिरछी क़ातिल अदा पर
मेरा फ़िदा हो जाना, कुछ न कह पाना

मेरी आशिक़ी हद पार कर जायेगी
यह जान जायेगी, गर तू मुझे आज़मायेगी
सामने से गुज़रते हो, और सब जानते हो
बता भी दो मेरी जान, तू कब चाहेगी

मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए
पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए
जीता है तेरे लिए, मरता है तेरे लिए

– ‘नज़र’
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यह प्यार चीज़ क्या है?
दीवानों का है काम
बेकार ही पीछे दौड़ते हैं
बिन सोचे अन्जाम

कहते थे कि प्यार हमको होगा नहीं
क्यों हो गया न प्यार…!

बहुत तन के चलते थे
जब घर से निकलते थे
प्यार में क्या रखा है
बस एक ही बात रटते थे

आज मुँह पर उल्टी आ पड़ी हर बात
क्यों हो गया न प्यार…!

आज क्या हुआ
वह नाक पे बैठा हुआ गुस्सा
चलो लाओ दो हमें
प्यार में हमको हमारा हिस्सा

अजी नज़र चुराकर कहाँ चल दिए
क्यों हो गया न प्यार…!

प्यार ख़ूबसूरत है
यह दिल की ज़रूरत है
दुनिया में बस यही
ख़ुदा की एक इनायत है

आज तुमको हो गया हमपे एतबार
क्यों हो गया न प्यार…!

– ‘नज़र’

 

પ્રતિસાદ આપો

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